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छंदमुक्त में-
अक्स को अपने
तुम हो तो
तुम्हारी उदासी
क्षितिज के उस पार

एक क्षणिका

 

एक क्षणिका

तेज़ हवा के साथ
बलखाती रेत से
हवा ने जाने क्या कहा?
वो ऊपर उठ गई,
एक बवंडर बन गया

२१ फरवरी २०११

 

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