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अनुभूति में प्रवीण चंद्र शर्मा की रचनाएँ

छंदमुक्त में-
झील के ठहरे जल से
थोड़ी देर
न ययौ न तस्थौ
प्रार्थना
शेषयात्रा
स्पंदन
हत्या का रहस्

 

 

स्पंदन

नहीं उड़े मेरे साथ-
वे हज़ारों पक्षी
जो मेरे भीतर
उड़ाने भरते रहे

फूट कर बाहर
नहीं निकले-
वे असंख्य झरने
जो मेरे भीतर
दबे स्वरों में
रोते रहे
वे बंदी पक्षी-
जो फड़फड़ाते रहे
वे अवरुद्ध झरने-
जो कुलबुलाते रहे
कहीं वही तो नहीं थे
स्पंदन जीवन के!

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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