अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में राहुल राजेश की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
पत्तियाँ
चीजें
मेटर्निटी वार्ड
 

 

चीज़ें

हर नई चीज़
पुरानी चीज़ में बदल जाती है
और धीरे-धीरे एक दिन
कबाड़ बन जाती है

हम उन्हें कबाड़ियों के हाथ बेच देते हैं
और वही चीज़ें फिर नए आमंत्रण के साथ
बाज़ार में आती हैं

हम उन्हें फिर घर ले आते हैं

इस तरह
हमारे ही घर से निष्कासित चीज़ें
हमारे घर में फिर से
जगह बनाती हैं ।

६ अप्रैल २००९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter