अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में राहुल राजेश की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
पत्तियाँ
चीजें
मेटर्निटी वार्ड
 

 

 

पत्तियाँ

जब तक हरी हैं, भरी हैं
हरियाली से, नमक और पानी से
जब तक है रीढ़ और शिराआें में दम
जब तक उनकी असंख्य अदिख आँखों में है
धूप और हवा से अपना अन्न-जल
जुटा लेने की ताकत
तब तक टँगी रहती हैं, तनी रहती हैं
डाल से पेड़ों का अवलम्ब बनकर

सहती हुई धूप, धूल और बारिश
रचती हुई मीठी घनी छाया
और संगीत-सी सरसराहट
जिन्हें केवल वे ही रच सकती हैं
पत्तियाँ मधुमक्खियों की तरह ही
सिरजती हैं ओस की बूँदें
रात भर टपकती चाँदनियों से

जब डाल से झरती हैं
तो झरती हैं एक लय में
नृत्य करती हुई

एक ऐसा लय जिन्हें केवल
वे ही रच सकती हैं
एक ऐसा नृत्य जिन्हें केवल
वे ही कर सकती हैं !

जब वे झरती हैं डाल से
तो वे लय में झूमती इतराती नाचती हैं
यह सोचकर कि...

वे गिर नहीं रहीं
गिर नहीं रहीं

उतर रहीं हैं

ज़मीं पर !
ज़मीं पर !!

६ अप्रैल २००९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter