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अनुभूति में ऋषभदेव शर्मा की रचनाएँ-

नयी तेवरियों में-
पकने लगी फसल
मार्च आँधी
यह डगर कठिन है
यह समय है झूठ का
राजा सब नंगे होते

मुक्तक में-
बत्तीस मुक्तक

क्षणिकाओं में-
बहरापन (पाँच क्षणिकाएँ)

छंदमुक्त में-
दुआ
मैं झूठ हूँ
सूँ साँ माणस गंध

तेवरियों में-
रोटी दस तेवरियाँ
लोकतंत्र दस तेवरियाँ

 

यह डगर कठिन है

यह डगर कठिन है, तलवार दुधारी है
घात लगा कर बैठा क्रूर शिकारी है

वे भला समर्पण-श्रद्धा क्या पहचानें
उनके हाथों में नफ़रत की आरी है

ईरान कहें या अफ़ग़ानिस्तान कहें
घर-बाहर कोड़ों की ज़द में नारी है

मुट्ठी में ले जिसने आकाश निचोड़ा
कोमल मन लेकर वह सबसे हारी है

आदम के बेटों के पंजे शैतानी
नई सदी की यह त्रासद लाचारी है

१ सितंबर २०२३

टिप्पणी--
१-
(तेवरी काव्यांदोलन की घोषणा ११ जनवरी १९८१ को मेरठ, उत्तर प्रदेश, में हम कुछ मित्रों ने की थी। इसका घोषणा पत्र डॉ. देवराज और ऋषभ देव शर्मा ने जारी किया था। तेवरी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विसंगतियों पर प्रहार करने वाली आक्रोशपूर्ण कविता है। यह किसी भी छंद में लिखी जा सकती है। इसकी हर दो पंक्तियाँ स्वतः पूर्ण होते हुए भी पूरी रचना में अंतः सूत्र विद्यमान रहता है। तेवरी का छंद सम-पंक्तियों में तुकांत होता है। इसे अमेरिकन कांग्रेस की लाइब्रेरी के कॅटलॉग में 'पोएट्री ऑफ प्रोटेस्ट' कहा गया है।)

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