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अनुभूति में संजय अलंग की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
ईश्वर का दुख
गुलेल
झुमका बाँध
प्यास
सलवा जुडूम के दरवाजे से

 

ईश्वर का दुःख

मौन नहीं है वह
न ही तूती नक्कार खाने की
मन्दिर के घंटों की गूँज के बीच
अंतर्नाद बन गई है, उसकी वाणी
इसे पुजारी ही ईश्वर तक पहुँचाएगा
चढ़ी मिठाइयों से कुछ मीठापन
उसके लिए भी लाएगा
तब सम्प्रेषणता का इतिहास लिखा जाएगा
अर्पित वाणी मात्र लगे प्रलाप
उसे नहीं हो यह संताप
इसलिए बताया जाएगा
मन्दिर के बाहर आदमी की
गंदी, लीचड़, बदबूदार, भीख माँगती कृशकाया पर
मिठाइयों, फूलों और पुजारियों से
दबे होने की व्यस्तता के बावजूद
ईश्वर को बहुत दुःख है

११ मार्च २०१३

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