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अनुभूति में सतीश सिंह की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
चुपके से
झूठ
याद
याद करूँगा
स्मृतियाँ

  चुपके से

मैं तो चाहता था
सदा शिशु बना रहना
इसीलिए
मैंने कभी नहीं बुलाया
जवानी को
फिर भी
वह चली आई
चुपके से
जैसे
चला आता है प्रेम
हमारे जीवन में
अनजाने ही
चुपके से।

२२ मार्च २०१०

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