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अनुभूति में शशि रंजन कुमार की रचनाएँ -

छंदमुक्त में-
अभिलाषा
असाढ की बदली
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प्रेम : चिरंतन
बिछुडने से पहले
मृत्यु
याचना
याद
यही तो है प्यार
साँझ
सृजन

 

असाढ की बदली

असाढ की बदली
दो बूँद बरस कर
तड़पा गई
गर्मी से तप्त
वसुधा की प्यास
और बढा गई
असाढ की बदली
उसके चितवन की
एक झलक दिखला गई
सोए दर्द को
धीमे-से सहला गई।


१ अप्रैल २००४

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