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अनुभूति में विजयशंकर चतुर्वेदी की रचनाएँ -

छंदमुक्त में-
आखिर कब तक
कपास के पौधे
चूक सुधार
दस मौतें
पृथ्वी के लिए तो रुको

 

 

 

दस मौतें

पहला तीखा बहुत खाता था इसलिए मर गया
दूसरा मर गया भात खाते-खाते
तीसरा मरा इसलिए कि दारू की थी उसे लत
चौथा नौकरी की तलाश में मारा गया
पाँचवें को मारा प्रेमिका की बेवफ़ाई ने
छठा मरा इसलिए कि वह बनाना चाहता था घर
सातवाँ सवाल करने के फेर में मरा
आठवाँ प्यासा मर गया भरे समुद्र में
नौंवा नंगा था इसलिए शर्म से मरा ख़ुद ब ख़ुद
दसवाँ मरा इसलिए कि कोई वजह नहीं थी
उसके जीने की।

२९ मार्च २०१०

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