अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र' की रचनाएँ--

छंदमुक्त में-
अँग्रेज़ी माध्यम के बच्चे
घर के पिछवाड़े से

 

 

 

घर के पिछवाड़े से

घर के पिछवाड़े से
मालूम होता है
घर में रहने वालों का रहन सहन
पिछवाड़े कचरे में उड़ते खाली रैपर
घर के बच्चों के द्वारा खाये गये
बिस्किट केक और चाकलेट के
बताते हैं
घर के बच्चों की रुचि और उनके पापा की इनकम

घर के पिछवाड़े
फेंकी गई
या फेंकी न जाकर , समेट कर रख ली गई
रद्दी वाले को बेचने के लिये
प्लास्टिक और काँच की खाली डिब्बिया व शीशीयाँ
तय करती हैं घर की मालकिन
का गृहस्थी संचालन का तरीका


घर के पिछवाड़े से
कचरे में से आजीविका तलाश रहे
बच्चों से
बात करने का तरीका
घर वालों का
बताता है घर में रहने वालों का स्वभाव
घर के पिछवाड़े से

३० मार्च २००९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter