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अनुभूति में यश छाबड़ा की रचनाएँ

कविताओं में-
आईना
कल्पना
गाँव का कुआँ
फव्वारे का संदेश
बचपन का साथी
बारिश थमने के बाद
वो पुराना घर
हे प्रभु

 

हे प्रभु

हे प्रभु
खुशनसीब हूँ मैं
कि आप की नज़र
रही मुझ पर हमेशा
राह भटका कई बार
मगर हाथ थाम लिया
तुमने हर बार
बस यही प्रार्थना है मालिक
न फँसने देना कभी
मोह माया के जाल में
खुश रहूँ हमेशा
रखे तू जिस हाल में
चलूँ हमेशा नेक राह पे
अन्याय का कर सकूँ मुकाबला
बदल सकूँ किसी के आँसू
मुस्कुराहट में।

24 मई 2007

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