अंजुमन । उपहार ।कवि । काव्य चर्चा । काव्य संगम । किशोर कोना । गौरव ग्राम गौरवग्रंथ । दोहे । रचनाएँ भेजें । नई हवा । पाठकनामा । पुराने अंक । संकलन हाइकु । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । समस्यापूर्ति
अनुभूति में अशोक गुप्ता की रचनाएँ-
नई कविताएँ— अजन्मी चीं भैया चीं लंबी सड़क
कविताओं में— उन दिनों कैसे मैं समझाऊँ झूठ ग़लती मत करना गुर्खा फ़ोर्ट की हाइक दादाजी नदी के प्रवाह में पत्थर पागल भिखारी भाग अमीना भाग माँ रबर की चप्पल रेलवे स्टेशन पर रामला
अजन्मी
सर्दी की एक दोपहर को, बदली की छाँव-सी तुम आती हो।
धुँधलाते हुए सपने की तरह, यादाश्त के हाथों से फिसलती प्रेम अनुभूति की तरह,
और मेरे छू सकने से कहीं पहले ही तुम गायब हो जाती हो, मेरी अजन्मी कविता।
३० जून २००८
इस कविता पर अपने विचार लिखें दूसरों के विचार पढ़ें
अंजुमन। उपहार। कवि । काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें नई हवा ।पाठकनामा ।पुराने अंक । संकलन ।हाइकु ।हास्य व्यंग्य ।क्षणिकाएँ । दिशांतर ।समस्यापूर्ति
© सर्वाधिकार सुरक्षित अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।