अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में सरिता नेमानी की रचनाएँ

कविताओं में-
उसकी खामोशी
कैसा आतंक
साथ
 

 

साथ

जाना चाहती हूँ
क्षितिज के पास
पसंद करोगे क्या देना मेरा साथ
पाना चाहती हूँ
सहारा तुम्हारा
क्या पा जाऊँगी मैं वो किनारा
नहीं चाहती तुम बनो मेरी कमज़ोरी
क्या बन पाओगे
तेज़ ताक़त मेरी
चाहो तो
बना लो लोहे को सोना
नहीं चाहती मैं पारस को खोना
चाहो तो
डाल दो बेजान में जान
नहीं तो जीवन है वीरान
यदि ना हो मेरा साथ गँवारा
भूल जाना यह प्रस्ताव हमारा
ना हो तुम्हारे दिल को ये सब कुछ मंजूर
साफ़-साफ़
कर देना हमें नज़रों से दूर
और अगर चलना चाहो लेकर
हाथों में हाथ
तो चलना होगा
तुम्हें क्षितिज तक मेरे साथ
फिर कुम्हार तुम और बनूँ माटी मैं
जिस साँचे मे ढालोगे ढल जाऊँगी मैं

२४ मार्च २००८

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

website metrics