अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजें
पुराने अंकसंकलनहाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में डॉ. सुधा ओम ढींगरा की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
चाँदनी से नहाने लगी
प्रकृति से सीख
पूर्णता
बेबसी
मोम की गुड़िया

छंदमुक्त में-
कभी कभी
तुम्हें क्या याद आया
तेरा मेरा साथ
बदलाव
भ्रम
यह वादा करो

  तुम्हें क्या याद आया

तुम
अकारण रो पड़े--
हमें तो
टूटा-सा दिल
अपना याद आया,
तुम्हें क्या याद आया--

तुम
अकारण रो पड़े--
बारिश में भीगते
शरीरों की भीड़ में
हमें तो
बचपन
अपना याद आया,
तुम्हें क्या याद आया---

तुम
अकारण रो पड़े--
दोपहर देख
ढलती उम्र की
दहलीज़ पर
हमें तो
यौवन
अपना याद आया,
तुम्हें क्या याद आया--

तुम
अकारण रो पड़े--
उदास समंदर के किनारे
सूनी आँखों से
हमें तो
अधूरा-सा
घरौंदा
अपना याद आया,
तुम्हें क्या याद आया--

तुम
अकारण रो पड़े--
धुँधली आँखों से
सुलगती लकड़ियाँ देख
हमें तो
कोई
अपना याद आया,
तुम्हें क्या याद आया--

२२ दिसंबर २००८

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है