अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. आनन्द के दोहे-

नये दोहे-
बदल गया अब आदमी

दोहों में-
फैलाएँ सद्भाव
हुए सुवासित

 

 

 

 

फैलाएँ सद्भाव

ऐसा कुछ मत कीजिए, जिससे बढ़े तनाव।
सबको अपना मान कर, फैलाएँ सद्भाव।।

जप-तप, पूजा-पाठ से, मिटे नहीं संताप।
अनुरागी हो मन यदि, धुल जाए सब पाप।।

सद्भावों से फैलता, भाईचारा प्यार।
कदम बढ़ाकर देख लो, लोग सभी तैयार।।

सहज, सरल हो जिन्दगी, मन में उच्च विचार।
मुट्ठी में हो जाएगा, यह सारा संसार।।

दुर्लभ हो गए आजकल, अच्छे-सच्चे लोग।
मिल जाएँ तो मान लो, इसे सुखद संयोग।।

सदाचार, सत्कर्म का, रखते हैं जो ध्यान।
कहलाते वे संत जन, पाते जग में मान।।

करे भलाई जो सदा, वह सच्चा इंसान।
आलोकित करते सदा, उसका पथ भगवान।।

शील, विनय, संयम बिना, मानव है बेकार।
मान-शान की ज़िन्दगी, मिलती उसे उधार।।

आशा औ उत्साह की, फसल उगाएँ आज।
नैतिकता फूले-फले, सदा रहे ऋतुराज।।

मनुज-मनुज में प्यार हो, फैले स्नेह सुगंध।
आओ मिलजुल हम करें, ऐसा नव अनुबंध।।

१० नवंबर २००८

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter