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डॉ. योगेन्द्रनाथ
शर्मा अरुण

जन्म- ७ जनवरी १९४१ को कनखल, जिला
हरिद्वार, उत्तराखंड में।
शिक्षा- हिंदी में स्नातकोत्तर उपाधि एवं पीएच.डी.।
कार्यक्षेत्र- अध्यापन एवं लेखन। लगभग सभी प्रमुख साहित्यिक
पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। अनेक विषयों पर अनेक
पुस्तकें प्रकाशित। अनेक साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं के
सदस्य एवं पदाधिकारी।
संप्रति- पीलीभीत के स्नातकोत्तर कालेज से प्रधानाचार्य के पद
से सेवानिवृत्त होने के बाद स्वतंत्र लेखन।
ईमेल-
ynsarun@hotmail.com
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जीवन के अनुभव
लाल रंग उस लाल का, सबसे चटख
कमाल।
रंग जा लाल के रंग में, हो जा तू भी लाल।।
मिला जो कल मैं आपसे, ऐसा हुआ कमाल।
खाली हाथों था गया, लौटा माला - माल।।
दर्शन में उलझा रहा, दर्शन से था दूर।
उलझन उसको सौंप दी,देखा जब वह नूर।।
जीवन भर चलता रहा,जाने किस-किस राह।
सही राह तब ही मिली, जागी उसकी चाह।।
ये कमाल कैसा किया, छू कर मेरा हाथ।
सब को छोड़ पकड़ लिया, मैंने तेरा हाथ।।
मालिक तेरा कमाल है, चुनता फ़क़त फकीर।
माला- माल मुझको किया, दे मीरा - सी पीर।।
भूल गया था मैं तुझे, पर तेरा अहसान।
याद दिलाई आपनी, देकर इक मुस्कान।।
फूल-फूल में रम रहा, बस तेरा ही नूर।
जिनकी आँखें बंद हैं, सब हैं तुझसे दूर।।
मैं ही बैठा दूर था, लिए अहम् की प्यास।
छुवन नेह की जब मिली,आया तेरे पास।।
बुद्धि ने भरमा दिया, ख़त्म हुए अहसास।
जब दिल की धड़कन मिली,पाया तुमको पास।।
२३ अप्रैल २०१२ |