अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में डॉ. मोहन अवस्थी की अन्य रचनाएँ-

शहीदों के प्रति
बदलूँ किसे मैं (अनुगीत)
हुआ क्या रात भर (अनुगीत)

 

हुआ क्या रात भर

हुआ क्या रात भर कोई अगर सोया नहीं है
यही क्या कम कि उसने दिन अभी खोया नहीं है

उन्हीं को नींद की चाहत कि सपने देखते जो
कटीला कंकड़ों का पथ कभी टोया नहीं है
हुआ क्या रात भर कोई अगर सोया नहीं है

गया है रंग बदल, कि गंध में संकेत भी हैं
कि तुमने आँसुओं से घाव वह धोया नहीं है
यही क्या कम कि उसने दिन अभी खोया नहीं है

उदासी क्यों अभी तक, और रूखापन वही क्यों
तुम्हारा मन किसी के स्नेह ने मोया नहीं है
हुआ क्या रात भर कोई अगर सोया नहीं है

सहूँ कैसे हज़ारों रंग चेहरे पर चढ़े हैं
कि मैंने बोझ इतना तो कभी ढोया नहीं है
यही क्या कम कि उसने दिन अभी खोया नहीं है

न तो मंडित, न है उन्नत, न जीवन में चमक आई
हृदय ने क्षण-कणों का हार संजोया नहीं है
हुआ क्या रात भर कोई अगर सोया नहीं है

भयंकर भीड़ जिसमें हद नहीं है चिल्लपों की
यहाँ हर एक है कुछ इस तरह गोया नहीं है
यही क्या कम कि उसने दिन अभी खोया नहीं है

सुखी उसको समझिये दु:ख को पहचानता जो
दुखी वह जो किसी की याद में रोया नहीं है
हुआ क्या रात भर कोई अगर सोया नहीं है

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter