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अनुभूति में क्षेत्रपाल शर्मा की रचनाएँ-

नए गीतों में-
गीत सुलह का गाया जाए
जब भी बही हवा पुरवाई
साँझ सकारे
हँसी तुम्हारी चंदा जैसी

गीतों में-
कुछ आगजनी कुछ राहजनी
तेरी याद जनम भर आए
पहलेवाली बात नहीं है
बदल जाए मौसम

 

बदल जाए मौसम

मैं तो अपने दिल की कोई बात न कह पाया
तुम पूछो तो देखो शायद बदल जाय
मौसम

विगत दिनों से आसमान का
था मिजाज फीका
अनहोनी हो गयी
जायका बदल गया
जी का
बस फुहार से तर होने की हसरत थी बाकी
ओले जैसे पाये मैंने झोली के
शबनम

कई बार जीवन में ऐसे
अवसर आये है,
एक ओर है पुष्पकुंज
तो उधर
शिलाएँ हैं
मै चुपचाप सहमकर अपनी राह चला आया
नाम रूप पर पाने जाने कितने
संसकरन

शैल शिखर से टकराना भी
देखो तो आसान नहीं,
अब तक तो
सब कुछ था लेकिन अब
देखो पहचान नहीं
दर्दे दिल बादल का सच में दरिया हो जाना
बस बह जाना गली-गली वन उपवन
जड़ जंगम

२४ नवंबर २००८

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