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अनुभूति में राधेश्याम बंधु की
रचनाएँ-

नए गीतों में-
मौन को उत्सव बनाओ
यादों की खुशबू
यादों की निशिगंधा
ये सफेदपोश बादल
रिश्तों का अहसास

गीतों में-
क्यों नदियाँ चुप हैं
कजरारे बादल
जेठ की तपती दोपहरी में
धान रोपते हाथ
धैर्य का कपोत
निष्ठुर बादल
प्यासी नदी
बहुत घुटन है
भारत क्यों प्यासा
शब्दों के पंख

संकलन में-
रूप बादल हुआ

 

भारत क्यों प्यासा?

गंगा यमुना जिसे दुलारे, भारत क्यों प्यासा?
सागर जिसके चरन पखारे, भारत क्यों प्यासा?

बंजर में भी हम मेहनत के
फूल खिला देंगे,
प्यासी पोखर को जीने की
कला सिखा देंगे,
मधुऋतु जिसकी राह सँवारे, भारत क्यों प्यासा?

संबन्धों के हरसिंगार की
गंध न मुरझाए,
होली, ईद, दिवाली की
मुस्कान न लुट जाए।
रवि जिसकी आरती उतारे, भारत क्यों प्यासा?

आँगन से हिमगिरि सीमा तक
वीर जागते रहना,
पूजा से कीर्तन अजान तक,
बंधु जागते रहना।
गीता जिसको स्वर्ग पुकारे, भारत क्यों प्यासा?
गंगा यमुना जिसे दुलारे, भारत क्यों प्यासा?

१६ अप्रैल २००६

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