अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में अंशुमान अवस्थी की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
ओ खरीदार

दिनचर्या
धूप के रंग
पता
प्रेम: चार कविताएँ
मैं न आऊँगा
यह कोई व्यथा कथा नहीं
यादें
क्षणिकाएँ
धुआँ धुआँ ज़िन्दगी

  यह व्यथा कथा नहीं

यह कोई व्यथा कथा नहीं
कटाक्ष है

भोथरे हो गये हैं नेज़े
या सूख गया है लहू
जो दिखता था हर जगह
कहीं है अब नहीं

बंद मुट्ठी में
खनकते हैं घिस चुके सिक्के
जो दे गये थे दानदाता
जब चले कहीं नहीं

जिम्मा लिया था रोशनी का
कस्बे के व्यापारियों ने
जो पी गये खून सारा
पर अभी तक जले नहीं

माना कि सूख गयी हैं जड़ें
और सिमट गये हैं दायरे
पर ये जो जिस्म हैं तेरे मेरे
क्यों मिले गले नहीं

यह कोई व्यथा कथा नहीं
कटाक्ष है

१५ अक्तूबर २०००

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter