अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में असीम नाथ त्रिपाठी की रचनाएँ

कविताओं में-
इम्तिहान
याद आता है
यों ही मन मे एक ख़याल

क्षणिकाओं में-
क्यों, बीता हुआ ज़माना, ज़रा मुड़ के तो देखो

 

इम्तिहान

एक अजीब-सा है भय व्याप्त,
एक अनजानी-सी है घबराहट
किसी को किसी से नही है मतलब,
दिल में है सब के एक अकुलाहटट
हृदय में है जो, वो हो ना जाए विस्मृत,
इस विचार से दिल हो रहा है विचलित
मस्तिष्क पर पड़ रहा है ख़ासा ज़ोर,
उसकी क्षमता का हो रहा है पूरा प्रयोग.
शनैः शनैः समय हो रहा है क्षरित,
हृदय गति भी हो रही है त्वरित.
भूत पर हावी है इस समय भविष्य,
आशंका है, हो ना जाए अनिष्ट
तीन घंटे का यह संग्राम है

आज इम्तिहान है!

जनवरी २००८

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।