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अनुभूति में गिरिराज जोशी ''कविराज'' की रचनाएँ-

अस्तित्व
छुआछूत
दो लघु कविताएँ
मैं इंतजार करूँगा

 

छुआछूत

बहा दी थी जिसने
सारी गंदगी
गंदे नाले में,
जहाँ से बहकर
पहुँच गई वो
गंगा में. . .

आज उसी के
छू जाने से
हो गया मैं अपवित्र
तो किया गया
मुझे
पुनः पवित्र
चंद छींटे
मेरे बदन पर डालकर
उसी गंगाजल के. . .

9 मार्च 2007

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