अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में मानोशी चैटर्जी की रचनाएँ
अंजुमन में—
अपनी निशानी दे गया
कोई तो होता
लाख चाहें
ये जहाँ मेरा नहीं है
हज़ार किस्से सुना रहे हो

गीतों में—
होली गीत 

कविताओं में—
आज कुछ माँगती हूँ प्रिय
एक उड़ता ख़याल–दो रचनाएँ
कुछ जीर्ण क्षण
चलो
चुनना
ताकत
पुरानी बातें
मेरा साया
लौ और परवाना
स्वीकृति

संकलन में—
दिये जलाओ- फिर दिवाली है

 

मेरा साया

बहुत डरा हुआ था
मेरा साया
जब चली थी मैं घर से
रास्ते में न जाने कितने
अनजान लोगों की भीड़ में
खो गया कहीं वो
आज ढूँढ रहा
मेरा साया
मुझे गली गली
मगर आज
अपने साये से मुँह फेर
निकल चुकी मैं दूर कहीं
मेरा वो पुराना साथी
खो चुका भीड़ में
पूरी तरह।
अकेले अकेली राहों पर
चलते चलते देर तक
जब थक चुकी मैं
तब अचानक
मुझे मिला कहीं वो
मेरा भटकता हुआ साया
मेरा हमदम
पर आज उन फिरी नज़रों को
फिरा न सकी मैं
जो गिरी थी नज़रें
उन्हें उठा न सकी मैं
मेरे साये ने पहचाना नहीं मुझे
कि इतनी दूर जा चुकी मैं
अपनी पहचान बनाने की कोशिश में।

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है