अंजुमन उपहार । कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम
गौरवग्रंथ
दोहे रचनाएँ भेजें नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन
हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

 


AnauBaUit maoM pMkja kaohlaI kI 
rcanaaeM

tuma saa bana jaa}M
dSaa
~asadI

 

tuma saa bana bana jaa}M

gaBa- maoM AMgaaro dbaakr
AMtrmana kao Apnao tpakr
tuma kOsao [tnaI SaaMt hao

jvaalaamauKI tna kao caahto caIr
]sapr caplaa ka gaja-na AQaIr
tuma kOsao sahtI [tnao tIr

saagar saI ivaSaala tuma
kOsao rhI manauYya kao pala tuma
inat inahar ]sako tmaaSao
tuma kOsao hao [tnaI maaOna
rh sakta eosao kaOna

Apnaa sava-sva kr bailadana
tuma hsatI ek mahana
e maorI QartI maaM
mauJao yah vardana dao
eosaa mauJao sammaana dao
maOM tuma saa bana bana jaa}M

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम गौरवग्रंथ दोहे रचनाएँ भेजें
नई हवा
पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।