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अनुभूति में सचिन त्रिपाठी की रचनाएँ—

हास्य व्यंग्य में-
इंटरव्यू
कसाई
धन्नो
भूत
सपना

 

 

 

 

सपना

एक दिन भगवान श्री कृष्ण
मेरे सपनों में आए
हम थोड़ा-सा घबराए
थोड़ा-सा चकराए

हमने पूछा भगवन
कैसे समय निकाल पाए
कहने लगे
बस नींद नहीं आ रही थी
चले आए

पहले भक्तों के पास समय था
हमको याद किया करते थे
हम भी खाली थे
घूम-घूमकर
दर्शन दिया करते थे

समय बदल गया है
कलियुग में

इंटरनेट है
इस युग में

उर्वशी मेनका का नृत्य
अब मुझे भी रास नहीं आता
मेरे नयनों को भी
रिमिक्स भाता

पहले बाँसुरी बजा कर था
कपड़े चुराता
अब तन में नहीं है कपड़े
बता मैं क्यों आता

अच्छा भक्त देर हो रही है
मुझको जाना है
आज रात नौ बजे
फ़ैशन शो आना है

09 फरवरी 2007

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