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अनुभूति में विक्रांत की रचनाएँ

गली में शोर
संवेदना
सहमा सहमा
हम हों तुम हो

हिमपात

 

 

 

हम हों तुम हो

हम हों तुम हो और हों तनहाइयाँ
चाहे कितनी भी हों अपनी यहाँ रुसवाइयाँ

इश्क करना कोई जुर्म नहीं
ये तो है खुदा की ही परछाइयाँ

प्यार से हम तुम मिलेगें रोज़ यहाँ
रोज़ करेगें हम ये गुस्ताख़ियाँ

वक्त के हाथों हम न मजबूर होंगे कभी
हम करेगें कम हर दूरियाँ

इक बार तुम मुझे अपना कह दो
कम हो जाएगी मेरी हर परेशानियाँ

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।