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अनुभूति में विक्रांत की रचनाएँ

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संवेदना
सहमा सहमा
हम हों तुम हो

हिमपात

 

 

 

सहमा-सहमा

सहमा-सहमा-सा मैं रहता हूँ
तेरी तस्वीर को दिन रात देखता हूँ

खा जाऊँ इस बार भी मैं न ठोकर
इसलिए सँभल-सँभल कर मैं चलता हूँ

पर्वतों को पार करने की है ख़्वाहिश
इसलिए बादलों से दोस्ती करता हूँ

क्या अपनी तक़दीर मैं बदल पाऊँगा
ये बात मैं दिन रात सोचता हूँ

लगा के दो झूठे पंख आजकल
क्यों आसमान में मैं उड़ता फिरता हूँ

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।