अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. राकेश चक्र की रचनाएँ-

गीतों में-
अद्भुत संसार
आह्लाद कहाँ है
अविराम सफर
एक गुलाब खिला
जनतंत्र

 

अद्भुत संसार

किया-धरा
कुछ नहीं किंतु सब
शेख़ी रहे बघार
बड़ा ही अद्भुत है संसार

सिमटे सब अपने में निशि-दिन
करते रहते ताक-धिना-धिन
अलग राग बजता ढपली पर
बातों में ही बीता जीवन

लुटा न पाए प्यार
बड़ा ही अद्भुत है संसार

अपने हुए दूर जीवन से
तने रहे वे तन से मन से
दया-धरम का मोल न जाना
रहे चाहते वे कण-कण से

हरदम बस अधिकार
बड़ा ही अद्भुत है संसार

१ अक्तूबर २०१६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter