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अनुभूति में अनामिका सिंह की रचनाएँ-

गीतों में-
अनुसंधान चरित पर तेरे
अम्मा की सुध आई
चिरैया बचकर रहना
नाखून सत्ता के
राजा बाँधे शगुन कलीरे
 

अंजुमन में-
कसक उनके दिल में
चलो दोनों चलें
दिल में दुआएँ थीं
रोग है पैसा कमाना
ये सोचना बेकार है

  चिरैया बचकर रहना

परिधि तुम्हारे पंखों की लो
रहे हितैषी खींच
चिरैया बचकर रहना

रूढ़िवाद की पैरों में मिल
बेड़ी डालेंगे
तेरे चिंतन में पगली ये
आग लगा देंगे

रखें चरण दस्तार न झूठे
लें न प्रेम से भींच
चिरैया बचकर रहना

जगत हँसाई का कानों में
मंतर फूँकेंगे
करने वश में तुझे नहीं ये
जंतर चूकेंगे

छल के बगुले कर के धोखा
देंगे आँखें मींच
चिरैया बचकर रहना

साँसें कितनी ली हैं कैसे
बही निकालेंगे
चाल-चलन की पोथी पत्री
सभी खँगालेंगे

संघर्षो से हुई प्रगति पर
उछल न जाये कीच
चिरैया बचकर रहना

१ फरवरी २०२२

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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