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अनुभूति में आशीष नैथानी सलिल की रचनाएँ-

अंजुमन में--
ख़ता करके
चन्द सिक्के दिखा रहे हो
पहाड़ों पर सुनामी थी
बेमुनव्वर जिंदगी होने लगी
मुस्कुराना छोड़कर
सहर को सहर

 

सहर को सहर

सहर को सहर, रात को रात लिख
सुखनवर हमेशा सही बात लिख।

ज़रूरी नहीं झूठ का हो बखान
नज़र में हैं जैसे वो हालात लिख।

अगर धूप है तो लिखी जाय धूप
नहीं तो तू मौसम को बरसात लिख।

अधूरी रही या मुकम्मल हुई
थी जैसी भी वैसी मुलाकात लिख।

ये अच्छा है चलती रहे लेखनी
मगर बेवजह मत खुरापात लिख।|

१७ फरवरी २०१४

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