अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. दामोदर खडसे की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
कवच
कोरे शब्द
स्मृतियों की रेत
साथ साथ

 

स्मृतियों की रेत

समय को पार करते हुए
कई मोड़ अपना लेते हैं हमें
मोड़ चाहते नहीं कि ठहर जाए
कोई
समय की गति से बाहर
शायद इसीलिए
जिंदगी का कारवाँ
मिलने और विदा के बीच
निरंतर चलता रहता है !
इस गन्तव्य में
घनी छाया मिलती है अनायास
जहाँ रुककर
सुस्ता लेता है आदमी
घिर आते हैं अचल वृक्ष भी
आसपास
मौसम वृक्षों को देते हैं सबकुछ
राही पल भर प्राणवायु लेता है
कारवाँ चल पड़ता है
समय ठहरता नहीं
पर पदचिन्ह
रह जाते हैं स्मृतियों की रेत में !

६ जनवरी २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter