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अनुभूति में गौतम राजरिशी की
रचनाएँ -

अंजुमन में-
दूर क्षितिज पर सूरज चमका
सीखो आँखें पढ़ना
हवा जब किसी की कहानी
हादसा हो जाएगा

 

हादसा हो जाएगा

खोल ना गर मुख ज़रा तू, सब तेरा हो जाएगा
गर कहेगा सच यहाँ तो हादसा हो जाएगा

भेद की ये बात है यों उठ गया पर्दा अगर
तो सरे-बाज़ार कोई माजरा हो जाएगा

इक ज़रा जो राय दें हम तो बनें गुस्ताख-दिल
वो अगर दें धमकियाँ भी, मशवरा हो जाएगा

है नियम बाज़ार का ये जो न बदलेगा कभी
वो है सोना जो कसौटी पर खरा हो जाएगा

भीड़ में यों भीड़ बनकर गर चलेगा उम्र भर
बढ़ न पाएगा कभी तू, गुमशुदा हो जाएगा

सोचना क्या ये तो तेरे जेब की सरकार है
जो भी चाहे, जो भी तू ने कह दिया, हो जाएगा

तेरी आँखों में छुपा है दर्द का सैलाब जो
एक दिन ये इस जहाँ का तजकिरा हो जाएगा

यों निगाहों ही निगाहों में न हमको छेड़ तू
भोला-भाला मन हमारा मनचला हो जाएगा

१९ जनवरी २००९

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