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अनुभूति में गिरेन्द्र सिंह भदौरिया प्राण की रचनाएँ -

अंजुमन-
आग तो पी गया
पी गया वह पीर
ले चलता हूँ मैं
लेने लगीं अँगड़ाइयाँ
सपना था

 

ले चलता हूँ मैं

चल तुझे बाजार ले चलता हूँ मैं
धार के उस पार ले चलता हूँ मैं

लोग  पूछेंगे  गली में  क्या  हुआ
आज का अखबार ले चलता हूँ मैं

खून के प्यासे मिलेंगे यार सुन
हाथ में तलवार ले चलता हूंँ मैं

कायरों के बीच रहता ही नहीं
आदमी दमदार ले चलता हूँ मैं

शहर जंगल बन न जाएँ इसलिए
काम के फनकार ले चलता हूँ मैं

मज़हबी माँगेंगे चन्दा राह भर
पाँच दस कलदार ले चलता हूँ मैं

"प्राण" निकलें तो निकलने दीजिए 
मौत की सरकार ले चलता हूँ मैं

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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