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अनुभूति में सतपाल ख़याल की रचनाएँ-

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लो चुप्पी ली साध

 

 

  क्या है उस पार

क्या है उस पार, कोई शख़्स ये समझा न सका
क्या जगह है जो गया, लौट के भी आ न सका

मैं तो आदी हूँ विरासत में मिले ग़म मुझको
जो मेरे साथ रहा वो भी खुशी पा न सका

मैं सफ़र में हूँ यही रेत मुकद्दर मेरा
भटका दरिया हूँ समंदर का पता पा न सका

टूटे पत्तों को शजर बनके निहारा मैनें
जो गए उनको मनाकर भी कभी ला न सका

किससे मिलना है गले, हाथ मिलाना किससे
फ़ासला किससे रखूँ कितना समझ आ न सका

२२ मार्च २०१०

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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