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अनुभूति में सोनरूपा विशाल की रचनाएँ-

अंजुमन में-
अपनी ये पहचान
ज़रूरी है
पिता
माँ
सुब्ह फूलों से रात तारों से



 

'

अपनी ये पहचान

अपनी ये पहचान समझिये
आँसू को मुस्कान समझिये

चीखें, टीसें, ज़ख्मी आँखें
शहरों को शमशान समझिये

ग़म का चूल्हा रोटी उनकी
खूनी दस्तरखान समझिये

रस्मन है ये मातमपुर्सी
इसको मत एहसान समझिये

जो हर पल हँसते रहते हैं
उनके दिल सुनसान समझिये

रोज़ चुभेंगे काँटे दिल में
फूलों से नुकसान समझिये

१५ जुलाई २०१६

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