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मरण

  मरण

कुछ लोग जीते रहते हैं
आगे के समय में
मर जाने के लिए

अब तक मैं कैसे जीता रहा हूँ
जब पिछले समय में
मर चुका हूँ
कई-कई बार
जिससे तुम अब मिलती हो
वह मैं नहीं
मेरा प्रेत है
मैं ऐसा प्रेत हूँ
जिसे न जाने
क्यों तुम प्रेत मानने से
अस्वीकार करती हो
बार-बार
क्या तुम मुझे
एक प्रेत की तरह भी
जीने नहीं दोगी
अपने संसार में?

१८ मई २००९

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