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फ़ासला- एक पीढ़ी का
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संध्या का सूर्य
सभ्यता की पहचान
समुद्र की लहरें

  फ़ासला- एक पीढ़ी का

हम अपने बच्चों में देखते हैं
अपना बचपन, बचपन के दिन
हमारी दूरी होती है उनसे
एक पीढ़ी की।
आयु में ही नहीं, सोच में भी।

हमारे माँ-बाप हम से बूढ़े हैं
एक पीढ़ी दूर हैं।
वो उनमें अपना बचपन नहीं ढूँढ़ते
देखते हैं दुनिया को
इनकी नज़र से
कितनी सुंदर है ये
कितने खुश रहते हैं।
दूरी दो पीढ़ी की नहीं रहती
ख़त्म हो जाती है।
दूरी बिलकुल नहीं रहती।
-बच्चा बूढ़ा एक समान

२४ मार्च २००८

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