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सूर्य नमस्कार

मुक्तक में
घरः दस भावचित्र

 

सूर्यनमस्कार

झिर्रियों की धूप
देती है - आभास
बाहर
उग गया है - सूर्य ।
कुछ पल
लुके - छिपे, बंद झरोखों - दरारों से
झाँक लेगा
किसी एक कोने, नुक्कड़, किनारे ।

अँधेरी कोठरियों के वासी
रहेंगे ठिठुरते ही
काँपते ही
तड़फड़ाते ही ।

हड्डियों तक
बर्फ़ जमे लोग
कैसे करें
सूर्य-नमस्कार ?

16 नवंबर 2007

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