अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथ
दोहे पुराने अंकसंकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में कुहेली भट्टाचार्य की रचनाएँ

कविताओं में-
इंतज़ार में रहेगा सवेरा
एक बीज
घास के वक्ष से
तुम भी ठहरो

रोशनी होगी
वादा
सौंधी सुगंध

 

एक बीज

इस बीज को बोना चाहती हूँ
थोड़ीbr-सी धरती चाहिए
इस बीज को सींचना चाहती हूँ
थोड़ा बादल चाहिए।
इसे हवा मिले
पुरवाई चाहिए
इसे रोशनी मिले
थोड़ा सा आकाश चाहिए।
बड़ा होगा फलेगा, फूलेगा
धरती आनंद से छा जाएगी
अमृत लोक से लाई हूँ ये बीज।
बड़ा संक्रामक रोग है इसे
प्यार का रोग, फैलाता है यह
इससे धरती पर प्यार फैलेगा।

9br brमई 2007br

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter