अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में नीरज शुक्ला की रचनाएँ -

कविताओं में--
एक नीली नदी
कृष्ण विवर सी
बदलते परिवेश
शब्दों को

हाइकु में--
नीरज के हाइकु

संकलन में-
प्रेमगीत-- प्रेम


  हाइकु

जुनून दंगा
जले कच्चे घर
कोठियाँ नही

घायल करे
नकली मुस्कान
कोमलता से

नकली हँसी
कुटिल व्यवहार
शहरी जीवन

धूप सुबह
ओस-सा झिलमिल
इक सपना

स्वागत करो
सफेद रंग वाला
हाथी चला

देनी ही थी
एक दिन तो विदा
बेटी ठहरी

तुम्हें ताकती
घर की चौखट
कब आओगे?

उदास हुआ
समय का पहिया
दुनिया गोल

बन्द का असर
शान्तिपूर्ण रहा
८ मरे ४१ घायल

विज्ञापनों में
नारी गरजती है
आवाज़ कैद

रेत के टीले
तालाब बन गए
अपनी भूल

पेट खाली
दिमाग में सपना
चाँद-सी रोटी

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter