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अनुभूति में डॉ. पद्मा सिंह की रचनाएँ

कविताओं में
अधिकार
नीड़
बिना पाल वाली नाव
बसंत के इंतज़ार में
मैं तुम्हारी बेटी हूँ
शब्द की हथेलियों में

` नीड़

चिड़िया उड़ती है आकाश में
परों को तौलती
असीम विस्तार में
सपनों का स्वर्ग रचती

दूर घोंसले से रहकर भी
भूलती नहीं है वह

साँझ को
घर लौटना।

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