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जंगल का चुनाव

जंगल में आजकल
एक अफवाह फैली हुई हैं कि
शेर शाकाहारी हो गया है,
क्योंकि जंगल में
चुनाव आने वाला है।
गलत है यह सब।
विरोधियों की चाल है
मुझे बदनाम करने की।
यदि शेर घास खायेगा तो
उसमें और गधे में
क्या फर्क रह जायेगा?
यदि शेर कंद मूल और
फल खायेगा तो
उसमें और बंदर में
क्या फर्क रह जायेगा?
मैं शेर हूँ और
शेर ही रहूँगा।
जी हाँ, यह सच है कि
मैं चुनाव में खड़ा हूँ।
चाहे तोड़ने के लिये ही
किये जाते हो वादे,
फिर भी मैं
एक वादा करता हूँ आपसे।
अगले पाँच वर्षों तक
हर उस जीव को नहीं खाऊँगा
जो मुझे वोट देकर
जंगल का राजा बनने में
मेरी मदद करेगा

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