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सत्य
 

 

माटी का घड़ा

घड़ा माटी का था
फूट गया
मन तो माटी का नहीं था
क्यों टूट गया
माटी
घड़े की हो या देह की
जब-जब टूटती है
"धरती" है नया रूप माटी (का)
आस्था की कोंपल फिर
फूटती है।

१ अक्तूबर २००६

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