अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में सुषमा भंडारी की
रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
कुछ और क्षणिकाएँ

क्षणिकाओं में-
दस क्षणिकाएँ
चौदह क्षणिकाएँ

दोहे
सोलह दोहे

कविताओं में-
आज़ाद
सच

अंजुमन में-
गर्म हैं अख़बार
दिल में हमारे

 

दिल में हमारे

दिल में हमारे इक नई उलझन सी डाल कर
ये कौन जा रहा है यूँ दरिया खंगाल कर

ये दिल नहीं वो चीज हम यूँ बाँटते फिरें
रक्खा है हमने आज तक इसको संभाल कर

अच्छा है मेरी आँख से ये दूर ही रहें
आफ़त ही ले ली मोल कुछ ख़्वाबों को पाल कर

खोटे-खरे को तब ही तो पहचान पाओगे
देखो कहीं तो कोई तुम सिक्का उछाल कर

‘सुषमा’ नहीं तरल कि सब में ढ़ले सहज
रखना है खुद को एक ही साँचे में ढाल कर

४ फ़रवरी २००८ 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter