अंजुमन उपहार । कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम
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AnauBaUit maoM rGauvaIr sahaya 
kI rcanaaeM —

kivataAaoM maoM 
AiQanaayak
duinayaa
naSao maoM dyaa
piZ,yao gaIta
basaMt
basaMt Aayaa
Balaa

laGau rcanaaAaoM maoM 

Agar khIM maOM taota haota
caaMd kI AadtoM 
baaOr
panaI ko saMsmarNa
p`tIxaa

xaiNakaAaoM maoM 

vasaMt
caZ,tI s~I
Aga`oja,I
dRSya³1“
dRSya³2“

saMklana maoM 

QaUp ko paŠva–QaUp
vaYaa- maMgala – phlaa panaI

rGauvaIr sahaya ka pircaya

 

piZ,e gaIta

piZ,e gaIta
bainae saIta
ifr [na sabamaoM lagaa plaIta
iksaI maUK- kI hao pirNaIta
inaja Garbaar basaa[yao.

haoMya kŠTIlaI
AaŠKoM gaIlaI
lakD,I saIlaIø tibayat ZIlaI
Gar kI sabasao baD,I ptIlaI
Barkr Baat psaa[yao.

 

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