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अनुभूति में श्रीकृष्ण सरल की रचनाएँ-

कविताओं में-
आँसू
छोड़ो लीक पुरानी
जवानी खुद अपनी पहचान
देश के सपने फूलें फले
देश से प्यार
धरा की माटी बहुत महान
नेतृत्व
प्रकृति कुछ पाठ पढ़ाती है
पीड़ा का आनंद
प्रेम की पावन धारा
मत ठहरो
मुझमें ज्योति और जीवन है
वीर की तरह
शहीद
सैनिक

  धरा की माटी बहुत महान

धरा है हमको मातृ समान
धरा की माटी बहुत महान

स्वर्ण चाँदी माटी के रूप
विलक्षण इसके रूप अनेक
इसी में घुटनों घुटनों चले
साधु संन्यासी तपसी भूप
इसी माटी में स्वर्ण विहान
इसी में जीवन का अवसान
धरा की माटी बहुत महान

धरा की माटी में वरदान
धरा की माटी में सम्मान
धरा की माटी में आशीष
धरा की माटी में उत्थान
धरा की माटी में अनुरक्ति
सफलता का निश्चित सोपान
धरा की माटी बहुत महान

धरा देती है हमको अन्न
धरा रखती है हमें प्रसन्न
धरा ही देती अपना साथ
अगर हो जाते कभी विपन्न
धरा की सेवा अपना धर्म
धरा अपनी सच्ची पहचान
धरा की माटी बहुत महान

१६ जून २००५

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है