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अनुभूति में रजनी मोरवाल की रचनाएँ-

गीतों में-
आँधियाँ चलने लगीं हैं
कौन समझ पाया है
ज़िन्दगी का मोल
राह कठिन है जीवन की
रिश्तों का आधार

 

कौन समझ पाया है

जीवन की परिभाषा आखिर
कौन समझ पाया है 

उलझ गए प्रश्नों के फीते
जाके अलगनियों में
उत्तर के आँचल की डोरी
अटकी चिटखनियों में
अनसुलझे ही प्रश्न रह गए
सन्नाटा छाया है

तृष्णा गिरती ओ’ उठ जाती
दंभ भरी मकड़ी-सी
प्राण छिटक कर गए हाथ से
लाश रही अकड़ी-सी
गम पीकर दु:ख सहकर टूटी
बेचारी काया है

यौवन की बगिया में जब तक
फूल विहँसते रहते
रस के लोभी भँवरे तब तक
मधु के बीच मचलते
पीड़ा का सहभागी बनकर
कब कोई आया है

२२ जुलाई २०१३

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