अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में रजनी मोरवाल की रचनाएँ-

गीतों में-
आँधियाँ चलने लगीं हैं
कौन समझ पाया है
ज़िन्दगी का मोल
राह कठिन है जीवन की
रिश्तों का आधार

 

ज़िन्दगी का मोल

ज़िन्दगी का है नहीं कुछ मोल
हो सके तो प्रेम इसमें घोल

मौसमों से माँग ले तू रंग कुछ न्यारे
आसमाँ की चाँदनी से सुरमयी तारे
रात-दिन फिर
ख़ुशबुओं में टोल

दुख है जग में कि तू अव्वल बना फिरता
और सबको हेय कह पागल बना फिरता
है अहं की नाव
डावाँडोल

रूप दौलत धन भवन क्या काम के तेरे
मित्र रिश्ते शोहरत बस नाम के तेरे
मोह का संसार
सारा गोल

उम्र की अंतिम घड़ी अब आ रही प्यारे
साँस काया की रुकी अब जा रही प्यारे
बोल दो मीठे
अरे! तू बोल

२२ जुलाई २०१३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter