अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में रजनी मोरवाल की रचनाएँ-

गीतों में-
आँधियाँ चलने लगीं हैं
कौन समझ पाया है
ज़िन्दगी का मोल
राह कठिन है जीवन की
रिश्तों का आधार

 

राह कठिन है जीवन की

राह कठिन है
जीवन की पर हार नहीं मानी है
पर्वत-सी ऊँची मंज़िल पर
चढ़ने की ठानी है

पीड़ा का अंबार लगा
ज्यों लहरों की टोली है
सागर के तट पर जा बरसी
टीस मुई भोली है
जीवन नौका गोता खाए
अंतहीन पानी है

देह किरचती शीशे जैसी
व्याकुल हैं इच्छाएँ
प्राणों में निष्ठुर आशाएँ
हरदम आग लगाएँ
अन्तर में साँसों के फेरे
मौन हुई वाणी है

सन्नाटे हैं बिखरे पथ पर
काँटो का घेरा है
चंदनवन में ज्यों विषपायी
सर्पों का डेरा है
यादें मन को हरती हैं पर
दु:ख से बेगानी हैं 

२२ जुलाई २०१३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter