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शशि पुरवार

जन्म- २२ जून १९७३ को इंदौर ( म. प्र.) में।
शिक्षा- विज्ञान में स्नातक तथा राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि। कंप्यूटर साफ्टवेयर में डिप्लोमा

कार्यक्षेत्र-
देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में आलेख, व्यंग्य, छंद एवं छंदमुक्त रचनाएँ, लघुकथा एवं कहानियों का प्रकाशन। सपने नाम से एक ब्लॉग, हिंदी से मराठी अनुवाद, बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ व नारीसशक्तिकरण हेतु अभियान। महाराष्ट्र वन विभाग द्वारा वन जल व नदी बचाओ अभियान के लिये तिलिस्मी दुनिया गीत का चयन। कुछ गीत राजभाषा समिति द्वारा प्रकाशित दिल्ली मंत्रालय में सुरक्षित दस्तावेज के रूप में सहेजे गए। अनेक कविता संकलनों और व्यंग्य संग्रहों में सहभागिता। दर्शन दरवेश द्वारा कुछ कविताओं का पंजाबी अनुवाद प्रकाशित। अनेक राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलनों में सहभागिता एवं व्याख्यान। अंग्रेजी कविताओं का न्यूज़ बुलेटिन में प्रकाशन।

प्रकाशित कृतियाँ -

  • व्यंग्य की घुड़दौड़ (व्यंग्य संग्रह)
  • धूप आँगन की- (गद्य एवं पद्य संग्रह)
  • मन का चौबारा (कविता संग्रह)
  • जोगनी गंध (हाइकु संग्रह)
  • भीड़ का हिस्सा नही (गीत-नवगीत संग्रह)
  • एक ब्लाग सपने नाम से।

सम्मान एवं पुरस्कार-
मिनिस्ट्री ऑफ़ वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट' द्वारा भारत की १०० वूमेन अचीवर्स आफ इंडिया 2016 मैं चयनित होकर महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी के कर कमलों द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक प्रमुख साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित।

ईमेल- shashipurwar@gmail.com
 

 

अनुभूति में शशि पुरवार की रचनाएँ -

माहिया में-
सपनों में रंग भरे

गीतों में-
अब्बा बदले नहीं
कमसिन साँसें
कण-कण में बसी है माँ
गीतों में बहना
गुलाबी खत
जिंदगी को मिल गई है
जिंदगी जंगी हुई
जिंदगी हमसे मिली
तिलिस्मी दुनिया

देखा है लोगों को हमने
धुआँ धुआँ
नदी सी प्यास
व्यर्थ के संवाद
सहज युगबोध
थका थका सा
दफ्तरों से पल
नदी सी प्यास
भीड़ का हिस्सा नहीं हूँ
मनमीत आया है
महक उठी अँगनाई
याद की खुशबू
समय छिछोरा
व्यर्थ के संवाद
व्यापार काला

सहज युगबोध

हाइकु में-
ग्यारह हाइकु

संकलन में-
फूल कनेर का- नन्हा कनहल
ममतामयी- ममता की माँ धारा
          माँ शक्ति है माँ भक्ति है
          माँ का आशीष शुभ दुलार
वर्षा मंगल- नये शहर में
सूरज- आ गए जी
नयनन में नंदलाल- सुनें बाँसुरी तोरी
                मन हो जाए चंगा
नया साल- नये वर्ष की गंध
         उम्मीदें कुछ खास
         हौसलों के गीत गाओ
पिता की तस्वीर- याद बहुत बाबूजी आए
पेड़ नीम का- हर मौसम में खिल जाता है
मातृभाषा के प्रति- प्रिय हस्ताक्षर
               मातृभाषा के प्रति
मेरा भारत-       भारत को कहते थे
रघुनंदन वंदन- पावन धरती राम की
शुभ दीपावली- झूल रहे कंदील
            जगमगाती है दिवाली
            दीपावली हाइकु
हरसिंगार- हरसिंगार हाइकु
होली है- फागुन के अरमान
       होली आई री सखी

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